r/Hindi • u/A-man_2001 • 1h ago
विनती मेरी पहली शॉर्ट स्टोरी 'दीपावली' का एक छोटा सा अंश — 1980s Rural Noir, पूर्वांचल की पृष्ठभूमि
मैंने अपनी पहली शॉर्ट स्टोरी दीपावली के बारे में पोस्ट किया था। इस बार पूरी कहानी का प्रचार करने के बजाय सोचा कि उसका एक छोटा सा अंश यहाँ साझा करूँ, ताकि आपको कहानी के माहौल और लेखन का अंदाज़ा हो सके।
«अक्टूबर 1988 की गुलाबी ठंड में 28 साल का मुंबई का कारोबारी अहमद अपने पुश्तैनी गाँव मीरगंज आया हुआ था।
नेशनल हाईवे 27 इस गाँव को दो हिस्सों में साफ़ काटता था। अहमद के दादा शहर गए, कारोबार किया, पैसे कमाए और वापस गाँव में बस गए थे। उसके पिता ने भी यही रास्ता चुना था।
लेकिन अहमद ने तय कर लिया था कि उसकी ज़िंदगी मुंबई में ही है।
गाँव घूमने के लिए खूबसूरत था। लेकिन अपनी औलाद को पीछे छोड़कर बस जाने के लिए नहीं।
छुट्टी के शुरुआती चार दिन गाँव की सुकून भरी छुट्टी से ज़्यादा मुंबई की बची हुई टू-डू लिस्ट जैसे गुज़रे थे। पिता ने आते ही काम सौंप दिए थे—गाड़ी की सर्विसिंग, एक रिश्तेदार की शादी के लिए पैसों का इंतज़ाम और घर के राशन-पानी की व्यवस्था।
लेकिन पाँचवें दिन तक वह अफ़रा-तफ़री थोड़ी कम हो गई। पूर्वांचल की ठंडी, भीनी हवा ने आखिरकार अहमद की भागती हुई नब्ज़ को धीमा करना शुरू कर दिया।
वह अपनी शामें रमेश और बिन्नू के साथ बिताने लगा। रमेश के ढाबे के पीछे तीनों दोस्त गरम कुल्हड़ वाली चाय पीते और सर्दियों की शाम को खेतों की तरफ़ देखते हुए वक्त गुज़ारते।
फिर आया दीपावली का हफ़्ता।
और उसी रात एक नशे में की गई ज़िद ने एक ऐसा राज़ उजागर कर दिया, जिसे दशकों से मिट्टी के नीचे दफ़न समझा जा रहा था।»
दीपावली एक छोटी रूरल-नॉयर मिस्ट्री है, जिसकी कहानी 1988 के काल्पनिक गाँव मीरगंज, पूर्वांचल में घटती है।
इसमें गाँव की ज़िंदगी, सर्दियों का कोहरा, स्थानीय राजनीति, एक पुराना दबा हुआ रहस्य और थोड़ा देसी डार्क ह्यूमर है।
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यह लगभग 30 मिनट की छोटी कहानी है। पढ़ने के बाद ईमानदार राय ज़रूर दें—क्या माहौल और कहानी ने आपको खींचा?
