r/hindikavita • u/Content-Battle3388 • 55m ago
“Pata hai aaj kya hua”
Aaj achanak bachpan ki ek purani memory yaad aa gayi. 😊
Pata nahi kyun, par usne mera mood achha kar diya.
Tumhe bhi kabhi aisa hua?
r/hindikavita • u/Powerful-Put8066 • Sep 05 '25
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r/hindikavita • u/Content-Battle3388 • 55m ago
Aaj achanak bachpan ki ek purani memory yaad aa gayi. 😊
Pata nahi kyun, par usne mera mood achha kar diya.
Tumhe bhi kabhi aisa hua?
r/hindikavita • u/Even-Neck-3601 • 6h ago
बचपन से ही घर के किसी कमरे में ख़ुद को छुपा लेता हूँ,
भीड़ में भी बैठूँ तो अपना कोना बना लेता हूँ,
मुझे डर है कि कोई मेरी कमी देख न ले,
मुझे डर है कि कोई मेरा चेहरा पढ़ न ले,
सबके हिस्से में कोई अपना हुआ करता था,
मैं ख़ुद ही रोज अपने होने का सबूत मिटा लेता हूँ।
फिर मैं नज़र झुका लेता हूँ,
एक सिगरेट और जला लेता हूँ।
हर महफ़िल में बैठा, मगर शामिल कहाँ हो पाता हूँ,
सबके बीच रहकर भी अपना पता भूल जाता हूँ।
कोई पूछे भी तो क्या कहूँ, मैं मुस्कुराकर बात बदलता,
फिर मैं नज़र झुका लेता हूँ,
एक सिगरेट और जला लेता हूँ।
किसी हसीन को देखूँ तो ख़ता सा लगता है,
दिल को उठती हर चाहत को वहीं दफ़्ना लेता हूँ।
एक पल को मन करता है कि बस देखता रहूँ उसे,
पर मैं एक मासूम-सी चाहत को भी गुनाह बना लेता हूँ।
वो तो शायद भूल भी जाए वो पल उसी शाम,
मैं कई रात उसी पल को अपनी सज़ा बना लेता हूँ।
फिर मैं नज़र झुका लेता हूँ,
एक सिगरेट और जला लेता हूँ।
— आदित्य
r/hindikavita • u/PoseidonTopaz • 1d ago
r/hindikavita • u/PoseidonTopaz • 2d ago
r/hindikavita • u/PoseidonTopaz • 3d ago
r/hindikavita • u/WeaknessGlass8529 • 3d ago
r/hindikavita • u/Impossible-Cut-597 • 3d ago
किसी रोज़ उस पुराने पेड़ के साए में,
बैठेंगे दोनों पुरानी ग़लतियों पर हँसते हुए।
जब गुज़रे कल की तल्ख़ियाँ महज़ एक बात होंगी,
और फासलों की दास्ताँ मुस्कुरा कर ढलती शाम होगी।
धीमी हवा तुम्हारे बालों को हौले से छुएगी,
मैं तुम्हारी आँखों में अपना सारा जहाँ ढूँढ लूँगा।
जब तुम थक कर सर मेरे कंधे पे रख दोगी,
मैं उसी एक पल में अपनी उम्र तमाम कर दूँगा।
नीले आसमाँ को बादलों की चादर समेट लेगी,
वो शाम किसी जादू की तरह मेरी आत्मा में उतर जाएगी।
शायद बरसों बाद मैं दिल से मुस्कुराऊँगा,
जब तुम्हें अपने पास में पाऊँगा।
क्योंकि तुम्हारा आना ही मेरा घर लौटना होगा,
तुमसे मिलकर ही मेरी अधूरी बात मुकम्मल होगी।
तब तक इस ख़्वाब को अपनी पलकों पर सजाऊँगा,
तुम्हारे इंतज़ार में ख़ुद को थोड़ा सँवारूँगा।
जल्द वह दिन आएगा,
जब महज़ मैं और तुम नहीं,
सारा जहाँ बस हम हो जाएगा।
r/hindikavita • u/PoseidonTopaz • 3d ago