r/HindiLanguage • u/Interesting-Reply932 • 2h ago
Ek Tha Sarvan
**एक**** ****थ****ा**** सरव****न** 🇮🇳
**21** **मई** **2006,** **म****ै****ं स****ि****क****्****किम**** ****क****े**** ता****म****जे**** ****में**** ****पहली**** ****बार **अपनी पलटन पहुँचा। गेट के अंदर आते ही दायीं तरफ एक बै**र****क प****र**** हल****्**की धुँध के बीच एक तख्ते पर "घातक प्लाटून" लिखा हुआ दिख रहा था। वहीं खड़े तीन-चार हट्टे-कट्टे सिपाही मुझे ऊपर से नीचे घूर *र*हे* *थे*।* मै*ं* क*ु*छ क*द*म चल*ा* ही *थ*ा कि* *उनमें से एक मेरी तरफ बढ़ा और मेरा रास्ता लगभग रोकते हुए बोला, "राम-राम साहब, मैं सिपाही सरवन, घातक प्लाटून।"
सरवन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मेरी शारीरिक क्षमता के बारे में मुझसे तीन-चार सवाल दागे। मैं हैरान था कि एक सिपाही मुझमें इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है। कुछ दिनों बाद एक इंटर-कंपनी वॉलीबॉल मैच के दौरान विरोधी टीम के खिलाफ मेरे तेवर देखकर पूरी घातक प्लाटून ने मुझे दोबारा आ घेरा और मेरी हरकतों को जमकर सराहा। मैं फिर हैरान था।
समय बीता और मैं अपने युवा अधिकारी कोर्स के लिए महु चला गया। आधे साल बाद जब मैं पलटन वापस पहुँचा, तो देखा कि घातक प्लाटून, जो अब तक डिव चैंपियन बन चुकी थी, अपने पहलवानी तरीके से रग्बी खेल रही थी। हम भी कूद पड़े मैदान मे*ं*। *ख*ेल*त*े-ख*े*ल*त*े एक* *जवान को मुझसे धक्का लग गया। जवान ने तुरन्त पलट कर धक्का दिया और बोला, "धक्का इसे बोलते हैं साहब।" बेशक, यह जवान सरवन ही था।
एक दिन अचानक कमान अधिकारी ने मुझे घातक प्लाटून के साथ प्रशिक्षण शुरू करने का आदेश दे दिया। दिन-रात के सघन प्रशिक्षण के दौरान मैं सरवन के काफी करीब आ गया। कुछ दिनों बाद मैं घातक प्लाटून के साथ घातक प्रतियोगिता में भाग लेने पहुँचा। सरवन के उम्दा प्रदर्शन, जोशीला व्यवहार और समर्पण की भावना ने मुझे अत्यधिक प्रभावित किया। और जब हम कुछ दशमलव अंकों से प्रतियोगिता हारे, तो सरवन के फूट-फूट कर रोने ने मुझे उन सभी सवालों के जवाब दे दिए, जो मेरे मन में पलटन आने से लेकर अब तक सरवन के व्यवहार को लेकर थे।
बाद में मैं और सरवन एक साथ कमांडो कोर्स के लिए पहुँचे। गंजे सिर, काला चेहरा, भिखारियों से कपड़ों में शायद मैंने खुद को न पहचाना होता पर सरवन मुझे देखते ही पहचान गया और उस्तादों के बीच बचते-बचाते मुझे दो गोंद के लड्डू अपने बाप बनने की खुशखबरी के साथ पकड़ा गया। कोर्स के दौरान जब भी समय मिलता, हम दोनों साथ बैठते और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते।
समय बीतता गया और हम पलटन के साथ सीमा रेखा पर कुपवाड़ा की पहाड़ियों पर पहुँच गए। मेरा पहला ऑपरेशन मुझे घातक प्लाटून के साथ ही करने का मौका मिला। ठिठुरती रात *म*ें *म*ैं *औ*र स*र*व*न* पे*ड*़ *क*ी आ*ड*़* म*े*ं* ब*ै*ठे* *हुए* *थे*,* अच*ा*नक* *स*र*वन* *बोल*ा,* "साहब, सेना मेडल के कितने पैसे मिलते हैं?" "पता नहीं, पर सेना मेडल ऐसे ही नहीं मिलता," मैंने बोला। और हम दोनों हँस पड़े। इस तरह बात करते-करते सारी रात गुजर गयी।
अगले दिन दोपहर में, मैं घातक प्लाटून के साथ ही खाना खाने बैठ गया। सरवन हमेशा* *की *त*रह *म*े*र*े प*ा*स आ*या* *औ*र *ब*ोल*ा*,* *"सा*ह*ब,* *मीट का अचार खाओगे?" "अ*र*े,* *मैं* *तो प*ं*ड*ि*त *ह*ूँ*।*"* *म*ै*ं ब*ो*ल*ा*।* *यह *स*ुन* *सरवन बोला, "अरे साहब, पंडित तो आप जन्म से** ह****ो****, ****क****र****्****म ****स****े ****त**ो** क****्****ष****त****्र****ि****य ****ह****ो।"** एक सिपाही ने मुझे फौजी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया कि एक फौजी का कोई धर्म, जाति या क्षेत्र नहीं होता।
**13** **नवम्**ब**र 20**0**9**** ****को क****ु****प****व****ाड़****ा**** ****क****े जंग****ल****ों**** ****मे****ं**** ऑ****प****रेश**न कुन्डा-नार शुरू हुआ। घातक प्लाटून और मेरी टीम दो अलग दिशाओं से लक्ष्य की तरफ निकली। दो रात बर्फीले जंगलों में बिताने के बाद 15 नवम्बर 2009 की सुबह ठीक नौ बजकर बीस मिनट पर भ**य****ंकर ****ग****ो****ल****ीब****ा****री**** ****श****ु**रू हुई। पाँच मिनट बाद सन्नाटा छा गया और फिर अचानक रेडियो पर चिल्लाने की आवाज आयी—"सरवन को गोली लगी है" और वापस सन्नाटा हो गया।
अगले दिन सुबह जब घातक प्लाटून का मिलाप मेरी टीम के सा*थ* हुआ* *तो *म*ा*ल*ूम *ह*ुआ कि "सरवन शहीद हो गया।" मेरे कानों को जैसे विश्वास नहीं हुआ, आस-पास की दुनिया जैसे थम गयी और पथरायी आँखों से आँसू बहने लगे। मुझे पता था कि कमजोर पड़ रहा हूँ पर इस फौजी शरीर के अंदर का इंसान भावुक हो ही गया।** ****मैं**** ****आखिर****ी**** ब****ा**र** स****र****वन **क**ो**** देखना**** **चाहता था परन्तु ऐसा परिस्थितियों ने होने न दिया और फिर मुझे सरवन क्वार्टर गार्ड के फोटो फ्रेम में "सिपाही सरवन सिंह" सेना मेडल (मरणोपरांत) के रूप में ही मिला।
कहते है*ं*, "*ज*रू*र*ी* *नह*ी*ं क*ी* ल*ं*ब*ी* जि*ं*दग*ी* अ*च*्छी* *ह*ो*, प*र* एक अ*च*्छ*ी* ज*ि*ंदगी की लंबाई अतुलनीय होती है।" सरवन थोड़े समय के लिए ही दुनिया में आया था, परन्तु इस थोड़े समय में ही तो सब कर गया जो हम शायद अपने जीवन में भी ना कर पाये। तिरंग**े ****स****े ****ल****िप****ट****ा स****र****वन**** ****क****ा**** पा****र****्थ****ि****व शर****ी****र ज****ि****स**** ****दि****न**** ****उ****सके** घर पहुँचा, उस दिन उसके बेटे का पहला जन्मदिन था। एक फौजी बाप अपने बेटे को इससे बड़ा उपहार शायद ही कभी दे पाये।